तिल-गुड़ की मिठास, पतंगों की उड़ान: मकर संक्रांति की अनोखी कहानी
मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का वह पावन पर्व है, जो सूर्य देव की यात्रा का उत्सव मनाता है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब उत्तरायण का शुभारंभ होता है। यह वह समय है जब दिन लंबे होने लगते हैं, सर्दी का प्रकोप कम होता है और प्रकृति नई ऊर्जा से भर उठती है। 2026 में यह पर्व 14-15 जनवरी के आसपास मनाया गया, जहाँ सूर्य का गोचर दोपहर में हुआ और उत्तरायण की शुरुआत ने लाखों दिलों में खुशी का संचार किया।
इस पर्व की अनोखी कहानी तिल-गुड़ की मिठास से शुरू होती है। तिल (सेसम) और गुड़ (जग्गरी) का संयोग सिर्फ स्वाद का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक है। शास्त्रों में कहा गया है कि तिल पापों का नाश करता है और गुड़ मिठास व प्रेम का प्रतीक है। मकर संक्रांति पर लोग एक-दूसरे को "तिल-गुड़ घाल, गोड गोड बोल" कहकर तिल-गुड़ के लड्डू, चिक्की या लड्डू बाँटते हैं। यह मिठास सिर्फ जीभ पर नहीं, रिश्तों में भी घुल जाती है।
उत्तर भारत में, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में, इस दिन खिचड़ी का विशेष महत्व है। मूंग दाल, चावल, घी और मसालों से बनी खिचड़ी को 'अक्षय पुण्य' देने वाला माना जाता है। यह सादगी भरा भोजन पाचन के लिए लाभकारी होता है और सर्दियों में गर्माहट प्रदान करता है। कई जगहों पर खिचड़ी बनाकर दान करने की परंपरा है, जो सामाजिक समानता का संदेश देती है।
2026 लेकिन मकर संक्रांति की सबसे रंगीन और रोमांचक कहानी पतंगों की उड़ान में छिपी है। खासकर राजस्थान के जयपुर में, जहाँ पतंगबाजी एक जुनून है। आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है—पतंगें लड़ती हैं, मनुहार करती हैं और "कैचे कट गया!" की पुकार गूंजती है। जयपुर का अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव, जलमहल के किनारे या छतों पर, हजारों लोगों को एकजुट करता है। पतंग उड़ाना सिर्फ खेल नहीं, बल्कि ऊँचाइयों को छूने की आकांक्षा और जीवन की स्वतंत्रता का प्रतीक है।
धार्मिक दृष्टि से यह दिन स्नान-दान का है। गंगा, यमुना या स्थानीय नदियों में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। तिल, गुड़, कंबल, अनाज का दान पुण्य फल देता है। यह पर्व फसल कटाई का आभार भी व्यक्त करता है, क्योंकि नई फसलें आती हैं और किसान सूर्य देव की कृपा मानते हैं।
मकर संक्रांति सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि जीवन का संदेश है—अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना, पुरानी कड़वाहट छोड़ मीठे रिश्ते बनाना और ऊँची उड़ान भरना। तिल-गुड़ की मिठास दिल को छूती है, तो पतंगों की उड़ान सपनों को छूती है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में बदलाव आते हैं, लेकिन सकारात्मकता और एकता से हम हर ऊँचाई छू सकते हैं।
(Akhilesh Kumar is the author)


