माघ स्नान की महिमा: कल्पवास और मोक्ष का अनोखा संगम हिंदू धर्म में माघ मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यकारी माना जाता है।

माघ स्नान की महिमा: कल्पवास और मोक्ष का अनोखा संगम

 हिंदू धर्म में माघ मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यकारी माना जाता है।  यह महीना तप, त्याग, आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का विशेष काल होता है।  तीर्थराज प्रयागराज (प्रयाग) में त्रिवेणी संगम—गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल—पर माघ स्नान की महिमा अपार है।  पद्म पुराण, मत्स्य पुराण और महाभारत जैसे ग्रंथों में वर्णित है कि माघ मास में संगम स्नान से पापों का नाश होता है, मन की शुद्धि होती है और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

 माघ स्नान का सबसे अनोखा और गहन रूप है कल्पवास।  'कल्प' का अर्थ समय का एक चक्र या युग होता है, जबकि 'वास' का अर्थ निवास।  इस प्रकार कल्पवास अर्थात् एक निश्चित काल तक संगम तट पर निवास करना।  यह साधना पौष पूर्णिमा (माघ मेला की शुरुआत) से प्रारंभ होकर माघ पूर्णिमा तक चलती है, जो लगभग एक माह की होती है।  कल्पवासी श्रद्धालु घर-बार, सांसारिक सुख छोड़कर संगम की रेती पर छोटे-छोटे तंबुओं या अस्थायी आश्रमों में रहते हैं।  कड़ाके की ठंड में भी वे संयम, ब्रह्मचर्य और सात्विक जीवन का पालन करते हैं।

 कल्पवास के प्रमुख नियम अत्यंत कठोर होते हैं, जो इसे एक सच्ची तपस्या बनाते हैं:

 प्रतिदिन तीन बार संगम या गंगा में स्नान (प्रातःकाल, दोपहर और संध्या)।

 केवल एक बार सात्विक भोजन या फलाहार।

 त्रिकाल संध्या, मंत्र जप, भजन-कीर्तन और हरि-हर का ध्यान।

 इंद्रियों पर पूर्ण संयम, क्रोध-लोभ से दूर रहना।

 दान, सेवा और आत्मनिरीक्षण में समय व्यतीत करना।

 पुराणों में कहा गया है कि माघ मास में कल्पवास करने से सौ वर्षों की तपस्या का पुण्य प्राप्त होता है।  यह साधना शरीर और मन का कायाकल्प करती है।  पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, मानसिक शांति मिलती है और मोक्ष की कामना पूरी होने लगती है।  कल्पवास न केवल व्यक्तिगत शुद्धि का माध्यम है, बल्कि सामूहिक आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र भी बनता है।  हजारों कल्पवासी एक साथ साधना करते हैं, जिससे वातावरण दिव्य हो उठता है।

 माघ स्नान और कल्पवास का संगम इसलिए अनोखा है क्योंकि यहाँ भक्ति और तप का अद्भुत मेल होता है।  सामान्य स्नान से पाप धुलते हैं, लेकिन कल्पवास से आत्मा का पूर्ण परिवर्तन होता है।  यह मोक्ष का सीधा द्वार खोलता है।  आज भी प्रयागराज के माघ मेले में लाखों श्रद्धालु इस साधना में शामिल होते हैं।

 माघ मास हमें सिखाता है कि सांसारिक माया से ऊपर उठकर जब हम संयम और श्रद्धा से ईश्वर की ओर बढ़ते हैं, तो मोक्ष अवश्य मिलता है।  यदि आप कभी प्रयाग में माघ स्नान का अवसर पाएं, तो कल्पवास की महिमा को अनुभव अवश्य करें।  यह अनुभव जीवन भर का मार्गदर्शन बन जाता है।

 (Akhilesh Kumar is the author)


 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

#buttons=(Good Work!) #days=(20)

हेलो दोस्तों https://www.novelists.co.in/ "मैं अखिलेश कुमार, एक उपन्यासकार और सामग्री लेखक हूँ। कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से समाज की अनकही पहलुओं को उजागर करने में रुचि रखता हूँ।""इस वेबसाइट पर प्रस्तुत सामग्री केवल सूचना और मनोरंजन के उद्देश्य से है। लेखक किसी भी प्रकार की त्रुटि, असंगति या नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं है।"Good Work
Accept !