होली भारत का सबसे रंगीन और खुशियों से भरा त्योहार है। यह बसंत के आगमन का स्वागत करता है, जब प्रकृति नए रंगों से सज जाती है और लोग पुरानी कटुता को भूलकर एक-दूसरे पर रंग बरसाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस रंग-बिरंगी होली के पीछे एक प्राचीन कहानी छिपी है, जो अच्छाई की जीत और बुराई के अंत की शिक्षा देती है?
बहुत समय पहले की बात है। एक राजा था—हिरण्यकशिपु। वह इतना शक्तिशाली और अहंकारी हो गया था कि खुद को भगवान मानने लगा। उसने घोषणा कर दी कि सारे लोग केवल उसकी पूजा करेंगे। लेकिन उसके अपने पुत्र प्रह्लाद ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। प्रह्लाद छोटा था, लेकिन उसका विश्वास भगवान विष्णु में अटूट था। वह दिन-रात भगवान का नाम जपता और कहता, "मेरे पिता भले ही राजा हों, लेकिन सच्चा भगवान तो विष्णु हैं।"
हिरण्यकशिपु को यह बात बहुत बुरी लगी। उसने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए—उसे पहाड़ से फेंका, जहर दिया, जंगली जानवरों के सामने छोड़ा—लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने प्रह्लाद की रक्षा की। आखिरकार, राजा ने अपनी बहन होलिका की मदद ली। होलिका को एक वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। राजा ने योजना बनाई कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठेगी, ताकि प्रह्लाद जल जाए और होलिका बच जाए।
फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात को होलिका दहन की तैयारी हुई। एक विशाल चिता जलाकर होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर उसमें बैठ गई। लोग इकट्ठे हुए और देखने लगे। लेकिन चमत्कार हुआ! होलिका का वरदान केवल तभी काम करता था जब वह अकेली आग में जाती। प्रह्लाद के साथ बैठने पर वरदान टूट गया। होलिका जल गई और प्रह्लाद भगवान की कृपा से सुरक्षित बाहर आ गया।
उसी रात से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई। लोग बुराई के प्रतीक होलिका को जलाते हैं और अच्छाई की विजय का जश्न मनाते हैं। अगले दिन धुलंडी यानी रंगों की होली खेली जाती है। प्रह्लाद की कहानी से प्रेरित होकर लोग कहते हैं—बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, सच्चाई और भक्ति के आगे वह कभी टिक नहीं सकती।
आज होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं रहा, बल्कि यह एकता, प्रेम और क्षमा का प्रतीक बन गया है। सुबह होलिका दहन की आग में पुरानी रंजिशें जल जाती हैं और दोपहर में गुलाल, अबीर और पिचकारी से रंग बरसते हैं। बच्चे, युवा, बुजुर्ग—सब मिलकर "बुरा न मानो, होली है" कहते हुए एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। घरों में गुजिया, मालपुआ, ठंडाई बनती है और गलियों में ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग नाचते-गाते हैं।
रंग-बिरंगी होली हमें सिखाती है कि जीवन भी रंगों से भरा होना चाहिए—लाल प्यार का, पीला उत्साह का, हरा शांति का और नीला गहराई का। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि बुराई को जलाकर अच्छाई को अपनाओ, झगड़ों को भूलकर गले मिलो और रंगों की तरह जीवन को जीवंत बनाओ।
तो आइए, इस बार होली को और भी रंगीन बनाएं—दिल से, प्रेम से और खुशी से।
होली की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌈🎉
(Akhilesh Kumar is the author)


