पिचकारी तैयार, दुश्मनी भूल जाओ – होली खेलो यारों!
फागुन का महीना आते ही हवा में रंगों की महक और दिलों में उमंग भर जाती है। पिचकारी तैयार, दुश्मनी भूल जाओ – होली खेलो यारों! यह नारा सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि होली के असली सार को बयां करता है। यह त्योहार रंगों का उत्सव है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा – यह पुरानी कड़वाहट, मन-मुटाव और दुश्मनी को धो बहाने का सबसे खूबसूरत बहाना है।
होली सिर्फ रंग लगाने और पानी उछालने का नाम नहीं है। यह वह पल है जब हम साल भर जमा की गई सारी नफरत, ईर्ष्या और छोटी-मोटी शिकायतों को भूलकर एक-दूसरे के गले लगते हैं। पिचकारी हाथ में हो, चेहरे पर गुलाल की लाली हो, और होंठों पर मुस्कान – बस इतना काफी है कि दुश्मन भी दोस्त बन जाए। पुरानी बातें याद करके क्या फायदा? आज तो बस रंग बरसाओ, हँसो, नाचो और जी भर के मस्ती करो।
यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में रंग तभी आते हैं जब हम दिल से पुरानी बातें भूल जाते हैं। होलिका दहन की रात बुराई जल जाती है और अगले दिन अच्छाई के रंग चारों तरफ बिखर जाते हैं। ठीक उसी तरह, होली के दिन हम अपनी छोटी-बड़ी दुश्मनियों को होलिका की तरह जला देते हैं और नए सिरे से दोस्ती की शुरुआत करते हैं।
याद रखो यारों – पिचकारी में पानी हो या रंग, उसका असली रंग तो प्यार का होता है। इसलिए आज के दिन किसी को भी न छोड़ना। पड़ोसी हो, पुराना दोस्त हो, या वो जो कभी मन में चुभ गया था – सबको बुलाओ, सबके साथ होली खेलो। क्योंकि होली का मतलब है – दुश्मनी भूल जाओ, दोस्ती का रंग चढ़ाओ!
तो चलो, पिचकारी भर लो, गुलाल तैयार कर लो, और चिल्ला दो पूरे जोश से –
बुराई को जला दो, प्यार के रंग बरसाओ!
होली है, होली है – खेलो यारों, होली है!
सभी को ढेर सारी रंग-बिरंगी होली की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌈🎉
पिचकारी तैयार है ना? तो अब बस... बरसाओ रंग! 💦❤️
पिचकारी तैयार, दुश्मनी भूल जाओ – होली खेलो यारों!
फागुन की हवा में रंग घुल गए हैं,
दिल की दीवारें अब पिघलने को हैं।
पिचकारी में बस पानी नहीं, स्मृतियाँ भरी हैं,
जो कल तक काँटे थे, आज फूल बन जायें।
होलिका की लपटों में जल गईं वो पुरानी बातें,
राख हो गईं ईर्ष्या, जल गईं वो कड़वी रातें।
सुबह हुई तो आकाश रंगों से सजा,
हर चेहरा अब इंद्रधनुष-सा चमका।
पिचकारी उठा लो, यारों, मत रुको अब,
दुश्मन के गाल पर भी रंग की लकीर खींच दो।
जो कभी नजरें चुराता था, आज आँखों में आँखें डाल,
गुलाल से लिख दो – "भूल गया सब, तू मेरा है यार!"
रंग उड़ते हैं हवा में, जैसे सपने जागे हों,
हँसी की लहरें उठतीं, जैसे नदियाँ बह चली हों।
कड़वाहट की धूल को बहा दे पानी से,
दोस्ती का रंग चढ़ा ले, जी भर के मन से।
आज न कोई बड़ा, न कोई छोटा,
सब एक रंग में रंगे, सब एक हो गए।
पिचकारी की हर फुहार में छिपा है संदेश,
दुश्मनी भूल जा, प्यार का रंग बरस जा!
तो चल, यारों, बाजू में बाजू मिला लो,
होली की लय में थिरकते हुए गा लो –
"रंग बरसे भीगे चunar वाली रंग बरसे..."
आज दिल भी भीग जाएँ, रंगों की इस बारिश में।
होली है...
रंगों की नहीं, रिश्तों की होली है।
पिचकारी तैयार है,
अब बस... बरसाओ प्यार! 🌈💦❤️


