77वाँ गणतंत्र दिवस: संविधान की शक्ति, भारत की पहचान वर्ष का मुख्य विषय “वंदे मातरम के 150 वर्ष” रहा, जो बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस राष्ट्रगान की रचना के डेढ़ सौ वर्ष पूरे होने का उत्सव था।

भारत का 77वाँ गणतंत्र दिवस एक बार फिर देश की एकता, विविधता और संवैधानिक मूल्यों की महिमा का प्रतीक बनकर उभरा।  26 जनवरी 2026 को कार्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड और समारोह ने पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक धरोहर, सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भरता की झलक दिखाई।  इस वर्ष का मुख्य विषय “वंदे मातरम के 150 वर्ष” रहा, जो बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस राष्ट्रगान की रचना के डेढ़ सौ वर्ष पूरे होने का उत्सव था।  “वंदे मातरम” न केवल स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र रहा, बल्कि आज भी यह भारत की पहचान और संविधान की शक्ति का प्रतीक है।

 संविधान: भारत की आत्मा

 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया।  डॉ.  भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता वाली प्रारूप समिति ने इसे ऐसे ढाला कि यह सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर अडिग खड़ा हो।  77 वर्षों में संविधान ने भारत को चुनौतियों से पार पाने की ताकत दी—आपातकाल से लेकर आर्थिक उदारीकरण, महिला सशक्तिकरण से लेकर डिजिटल क्रांति तक।

 इस वर्ष की झांकियों में “वंदे मातरम” और “आत्मनिर्भर भारत” के विषय प्रमुख थे।  30 झांकियां (17 राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों और 13 विभागों की) ने संविधान की भावना को जीवंत किया।  वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष प्रदर्शन और दुर्लभ कलाकृतियों ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

 मुख्य अतिथि और वैश्विक संबंध

 इस बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता थे—यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा।  यह पहली बार था जब यूरोपीय संघ के दो प्रमुख नेता एक साथ मुख्य अतिथि बने।  इससे भारत-यूरोपीय संघ के रणनीतिक संबंधों की मजबूती का संदेश गया।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “एक सफल भारत विश्व को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है।”  यह निमंत्रण भारत की बढ़ती वैश्विक साख और बहुपक्षीय सहयोग को दर्शाता है।

 परेड की झलकियां

 परेड में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और अर्धसैनिक बलों ने अपनी आधुनिक हथियार प्रणालियां जैसे ब्रह्मोस, अपाचे हेलीकॉप्टर, धनुष तोप और अन्य प्रदर्शित किए।  भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने “ऑपरेशन सिंदूर” जैसी थीम पर शानदार फ्लाईपास्ट किया।  सांस्कृतिक झांकियां, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और विभिन्न राज्यों की कलाएं ने विविध भारत की एकता को रेखांकित किया।

 संविधान की शक्ति, भारत की पहचान

 गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक चेतना है।  यह हमें अधिकार देता है, कर्तव्य सौंपता है और सपनों को पंख लगाता है।  77 वर्षों में हमने गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी प्रगति में बड़ी छलांग लगाई है।  आज आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया जैसे अभियान संविधान की भावना को साकार कर रहे हैं।

 अंत में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संदेश और प्रधानमंत्री के शब्दों ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया।  यह दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है—संविधान की रक्षा करने, लोकतंत्र को मजबूत करने और भारत को विश्व गुरु बनाने का।

 जय हिंद!  वंदे मातरम!

 (Akhilesh Kumar is the author)77वाँ गणतंत्र दिवस: संविधान की शक्ति, भारत की पहचान


 

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